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Co-ordination Compounds- I

Coordination compounds are those addition molecular compounds which retain their identity in solid state as well as in dissolved state.
In these compounds. the central metal atom or ion is linked by ions or molecules with coordinate bonds. e.g., Potassium ferrocyanide, K4 [Fe(CN)6].

Double Salts-
These are the addition molecular compounds which are stable in solid state but dissociate into constituent ions in the solution. e.g., Mohr’S salt, [FeSO4.(NH4)2So4.6H2O] get dissociate into Fe(2 +ve ions), NH4(1 +ve ion) and SO4(2 -ve ions).

Terms Related to Coordination Compounds-

1. Complex ion or Coordination Entity-
It is an electrically charged species in which central metal atom or ion is surrounded by number of ions or neutral molecules.
(i) Cationic complex entity– It is the complex ion which carries positive charge. e.g., [Pt(NH3)4]2+
(ii) Anionic complex -It is the complex ion which carries negative charge. e.g., [Fe(CN)6].

2. Central Atom or Ion-
The atom or ion to which a fixed number of ions or groups are bound is .ned central atom or ion. It is also referred as Lewis acid. e.g., in (NiCI2(H2O)4]. Ni is central metal atom. It is generally transition element or inner-transition element.

3. Ligands –
Ligands is electron donating species (ions or molecules) bound to the Central atom in the coordination entity.

These may be charged or neutral. LIgands are of the following types :
(i) Unidentate-  It is a ligand, which has one donor site, i.e., the ligand bound to a metal ion through a single donor site. e.g., H2O, NH3, etc.
(ii) Didentate– It is the ligand. which have two donor sites.
(iii) Polydentate- It is the ligand, which have several donor sites. e.g., [EDTA]4(-ve ions) is hexadentate ligand.
(iv) Ambidentate ligands- These are the monodentate ligands which can ligate through two different sites, e.g., NO(2 -ve ions), SCN(-ve ion), etc.
(v) Chelating ligands- Di or polydentate ligands cause cyclisation around the metal atom which are known as chelate IS , Such ligands uses two or more donor atoms to bind a single metal ion and are known as chelating ligands.
More the number of chelate rings, more is the stability of complex. The stabilisation of coordination compounds due to chelation is known as chelate effect. π – acid ligands are those ligands which can form π – bond and n-bond by accepting an appreciable amount of 1t electron density from metal atom; to empty π or π – orbitals.

4. Coordination Number-
It is defined as the number of coordinate bonds formed by central metal atom, with the ligands.e.g., in [PtCI6]2(-ve ions), Pt has coordination number 6. In case of monodentate ligands, Coordination number = number of ligands. In polydentate ligands, Coordination number = number of ligands * denticity.

5. Coordination Sphere-
The central ion and the ligands attached to it are enclosed in square bracket which is known as coordination sphere. The ionisable group written outside the bracket is known as counter ions.

6. Coordination Polyhedron-
The spatial arrangement of the ligands which are directly attached to the central atom or ion, is called coordination polyhedron around the central atom or ion.

7.Oxidation Number of Central Atom-
The charge of the complex if all the ligands are removed along with the electron pairs that are shared with the central atom, is called oxidation number of central atom.e.g., [CU(CN4)3(-ve ions), oxidation number of copper is +1, and represented as Cu(I).

जिवन..................!!

मैत्री

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ज्यांना मित्र असतील,
त्यांनी ते जपावेत…

ज्यांना मित्र नसतील,
त्यांनी ते शोधावेत…

मित्राशिवाय
जगण्याची वेळ
शत्रूवरही येऊ नये…

आपल्या तोडीचाच
किंवा त्यापेक्षा थोडा
वरचढ सेन्स ऑफ ह्यूमर
असणारं फ्रेंड सर्कल
असणं ह्यासारखं दुसरं
भाग्य नाही…

आणि आपण मारलेला
एखादा पंच समोरच्याला
समजावून सांगायची
वेळ येणे ह्यासारखं
दुर्भाग्य नाही….

समोरासमोर
नसतांनासुद्धा
गप्पा मारताना
टाईप केलेल्या
वाक्यांमधून
हवा तो अर्थ
पटकन समजून…

त्याचा अजून
तिरका अर्थ
काढून बोललेलं
वाक्य तिसरीकडे
नेऊन ठेवणे,
ह्यातली मजा
अवर्णनीय आहे…

वयाच्या बंधनाला
अमान्य करून
वाह्यातपणा चालू
ठेवला, की…

बुद्धी ताजीतवानी
राहते आणि मेंदू
अखंड क्रिएटिव्ह
राहतो…

“अरे तुझं वय कांय,
बोलतोयस काय?”
हा प्रश्न ज्याला पडतो,
ती माणसं अकाली
वृद्ध होतात…

येता जाता केलेला
फालतूपणा हा
आपले हॅप्पी हार्मोन्स
अबाधित ठेवतात…

एखादी गोष्ट
सिरियसली न घेता
अतिशयोक्ती वगैरे
करून त्याची पार
वाट लावणं ज्याला
जमतं तेच खरे मित्र…!!

एकमेकांवर
कडी करून
मिष्किलपणाची,
बालीशपणाची
किंवा टारगटपणाची…

एवढच कांय थोडी
फाजिलपणाची हद्द
गाठणे, हेच खरं
जीवन….!!

जिवन..................!!

कोर्ट मार्शल

आर्मी कोर्ट रूम में आज एक
केस अनोखा अड़ा था
छाती तान अफसरों के आगे
फौजी बलवान खड़ा था

बिन हुक्म बलवान तूने ये
कदम कैसे उठा लिया
किससे पूछ उस रात तू
दुश्मन की सीमा में जा लिया

बलवान बोला सर जी! ये बताओ
कि वो किस से पूछ के आये थे
सोये फौजियों के सिर काटने का
फरमान कोन से बाप से लाये थे

बलवान का जवाब में सवाल दागना
अफसरों को पसंद नही आया
और बीच वाले अफसर ने लिखने
के लिए जल्दी से पेन उठाया

एक बोला बलवान हमें ऊपर
जवाब देना है और तेरे काटे हुए
सिर का पूरा हिसाब देना है

तेरी इस करतूत ने हमारी नाक कटवा दी
अंतरास्ट्रीय बिरादरी में तूने थू थू करवा दी

बलवान खून का कड़वा घूंट पी के रह गया
आँख में आया आंसू भीतर को ही बह गया

बोला साहब जी! अगर कोई
आपकी माँ की इज्जत लूटता हो
आपकी बहन बेटी या पत्नी को
सरेआम मारता कूटता हो

तो आप पहले अपने बाप का
हुकमनामा लाओगे ?
या फिर अपने घर की लुटती
इज्जत खुद बचाओगे?

अफसर नीचे झाँकने लगा
एक ही जगह पर ताकने लगा

बलवान बोला साहब जी गाँव का
ग्वार हूँ बस इतना जानता हूँ
कौन कहाँ है देश का दुश्मन सरहद
पे खड़ा खड़ा पहचानता हूँ

सीधा सा आदमी हूँ साहब !
मै कोई आंधी नहीं हूँ
थप्पड़ खा गाल आगे कर दूँ
मै वो गांधी नहीं हूँ

अगर सरहद पे खड़े होकर गोली
न चलाने की मुनादी है
तो फिर साहब जी ! माफ़ करना
ये काहे की आजादी है

सुनों साहब जी ! सरहद पे
जब जब भी छिड़ी लडाई है
भारत माँ दुश्मन से नही आप
जैसों से हारती आई है

वोटों की राजनीति साहब जी
लोकतंत्र का मैल है
और भारतीय सेना इस राजनीति
की रखैल है

ये क्या हुकम देंगे हमें जो
खुद ही भिखारी हैं
किन्नर है सारे के सारे न कोई
नर है न नारी है

ज्यादा कुछ कहूँ तो साहब जी
दोनों हाथ जोड़ के माफ़ी है
दुश्मन का पेशाब निकालने को
तो हमारी आँख ही काफी है

और साहब जी एक बात बताओ
वर्तमान से थोडा सा पीछे जाओ

कारगिल में जब मैंने अपना पंजाब
वाला यार जसवंत खोया था
आप गवाह हो साहब जी उस वक्त
मै बिल्कुल भी नहीं रोया था

खुद उसके शरीर को उसके गाँव
जाकर मै उतार कर आया था
उसके दोनों बच्चों के सिर साहब जी
मै पुचकार कर आया था

पर उस दिन रोया मै जब उसकी
घरवाली होंसला छोड़ती दिखी
और लघु सचिवालय में वो चपरासी
के हाथ पांव जोड़ती दिखी

आग लग गयी साहब जी दिल
किया कि सबके छक्के छुड़ा दूँ
चपरासी और उस चरित्रहीन
अफसर को मै गोली से उड़ा दूँ

एक लाख की आस में भाभी
आज भी धक्के खाती है
दो मासूमो की चमड़ी धूप में
यूँही झुलसी जाती है

और साहब जी ! शहीद जोगिन्दर
को तो नहीं भूले होंगे आप
घर में जवान बहन थी जिसकी
और अँधा था जिसका बाप

अब बाप हर रोज लड़की को
कमरे में बंद करके आता है
और स्टेशन पर एक रूपये के
लिए जोर से चिल्लाता है

पता नही कितने जोगिन्दर जसवंत
यूँ अपनी जान गवांते हैं
और उनके परिजन मासूम बच्चे
यूँ दर दर की ठोकरें खाते हैं..

भरे गले से तीसरा अफसर बोला
बात को और ज्यादा न बढाओ
उस रात क्या- क्या हुआ था बस
यही अपनी सफाई में बताओ

भरी आँखों से हँसते हुए बलवान
बोलने लगा
उसका हर बोल सबके कलेजों
को छोलने लगा

साहब जी ! उस हमले की रात
हमने सन्देश भेजे लगातार सात

हर बार की तरह कोई जवाब नही आया
दो जवान मारे गए पर कोई हिसाब नही आया

चौंकी पे जमे जवान लगातार
गोलीबारी में मारे जा रहे थे
और हम दुश्मन से नहीं अपने
हेडक्वार्टर से हारे जा रहे थे

फिर दुश्मन के हाथ में कटार देख
मेरा सिर चकरा गया
गुरमेल का कटा हुआ सिर जब
दुश्मन के हाथ में आ गया

फेंक दिया ट्रांसमीटर मैंने और
कुछ भी सूझ नहीं आई थी
बिन आदेश के पहली मर्तबा सर !
मैंने बन्दूक उठाई थी

गुरमेल का सिर लिए दुश्मन
रेखा पार कर गया
पीछे पीछे मै भी अपने पांव
उसकी धरती पे धर गया

पर वापिस हार का मुँह देख के
न आया हूँ
वो एक काट कर ले गए थे
मै दो काटकर लाया हूँ

इस ब्यान का कोर्ट में न जाने
कैसा असर गया
पूरे ही कमरे में एक सन्नाटा
सा पसर गया

पूरे का पूरा माहौल बस एक ही
सवाल में खो रहा था
कि कोर्ट मार्शल फौजी का था
या पूरे देश का हो रहा था ?

मी......फक्‍त मीच

माझे भाग्‍य

बंगला गाडी गेली वाटनीत मोठयाला,
घराजवळची बाग गेली धाकटयाला,
सुपीक शेतीची जागा दिली छोटयाला,
किती माझे भाग्‍य आई वडिल आले माझा वाटयाला !!

पंच जमले होते आम्‍ही वाटनी करताना,
आगीत तेल ओतत होते आम्‍ही भांडताना, 
आम्‍ही उत्‍सुक होतो हिस्‍सा मागताना, 
त्‍यांना आनंद होत होता आमचा घर विभंगलेला दिसताना, 
सगळयात धन संपत्‍ती हवी होती मोठयाला, 
किती माझे भाग्‍य आई वडिल आले माझा वाटयाला !!

संपत्‍ती नावावर करण्‍याची प्रत्‍येकाला झाली होती घाई, 
आम्‍हाला कोण सांभाळेल या आशेने बघत होते बाबा आई, 
आई बाबा माझाकडे चला म्‍हणायला पुढे कोणीच सरकला नाही,  
मला कळलच नव्‍हतं माझा वाटयाला येईल काही, 
दाग दागिने आईचे दिले पंचांनी धाकटयाला, 
मात्र आई वडिल आले माझा वाटयाला !!

सगळे खुश झाले बनुन करोडपती,
फक्‍त आई वडिल हिच माझी मोठी संपत्‍ती, 
आई वडिलांच्‍या आर्शिवादाने मला मिळाली सुखशांती, 
शेवटी आई वडिलांचा आर्शिवाद येईल कामअंती, 
किती नशीबवान मी, काहीच कमी नाही माझा वाटयाला, 
किती माझे भाग्‍य आई वडिल आले माझा वाटयाला !!
मी......फक्‍त मीच

जिवन……..

जिवनाच्या अल्बममध्ये
आठवणींचे फ़ोटो असतात .
आणखी एक कॉपी काढायला
निगेटिव्ह्ज मात्र शिल्लक नसतात .

गजर तर रोजचेच
आळसाने झोपले पाहिजे,
गोडसर चहाचा घोट घेत
टॉम अँड जेरी पाहिल पाहिजे .

आंघोळ,
फ़क्त दहा मिनीटे?
एखाद्या दिवशी तास द्या, पण
आरशासमोर स्वतःला सुंदर म्हणता आल पाहिजे .

भसाडा का असेना
आपल्याच सुरात रमलं पाहिजे ,
वेडे वाकडे अंग हलवत
नाचणंसुद्धा जमलं पाहिजे.

गीतेचा रस्ता योग्यच आहे .
पण, एखादा दिवस
पाडगावकराना द्या,
रामायण मालिका नैतिक थोर
“बेवॉच” सुद्धा एन्जॉय करता आली पाहिजे.

कधीतरी एकटे
उगाचच फ़िरले पाहिजे,
तलावाच्या काठावर
उताणे पडले पाहिजे.

संध्याकाळी मंदिराबरोबरच
बागेतसुद्धा फ़िरलं पाहिजे .
‘फ़ुलपाखरांच्या’ सौंदर्याला
कधीतरी भुललं पाहिजे.

द्यायला कोणी नसलं
म्हणुन काय झालं ?
एक गजरा विकत घ्या
ओंजळभरुन फुलांचा नुसता श्वास घ्या.

रात्री झोपताना मात्र
दोन मिनीटे देवाला द्या,
एवढ्या सुंदर जगण्यासाठी
नुसतं थॅंक्स तरी म्हणा!